गुलाब चक्कर में आपका स्वागत है

रतलाम की समृद्ध विरासत का एक शाश्वत प्रतीक

सन्देश

रतलाम की ऐतिहासिक धरोहर गुलाब चक्कर का पुनरुद्धार हम सभी के लिए गर्व का विषय है। यह स्मारक हमारे गौरवशाली अतीत का प्रतीक है। यह धरोहर पूरे जिले की है और इसे संजोकर रखना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। मैं जिलेवासियों से अपील करता हूँ कि इसकी सुंदरता और महत्ता को बनाए रखने में सहयोग करें तथा पर्यटक भी यहाँ आकर रतलाम की इस अनूठी विरासत का अनुभव करें।
श्री राजेश बाथम
पूर्व जिला कलेक्टर, रतलाम

गुलाब चक्कर की विरासत

रतलाम के हृदय स्थल में स्थित गुलाब चक्कर, राजा रणजीत सिंह द्वारा 1879 में निर्मित एक ऐतिहासिक गोलाकार स्मारक है, जिसका नाम उनकी पुत्री गुलाब कुंवर के नाम पर रखा गया था। अपनी सममित सुंदरता, राजसी स्थापत्य कला और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध गुलाब चक्कर, शहर के गौरवशाली अतीत और समृद्ध परंपराओं का मूक साक्षी रहा है।

गुलाब चक्कर की झलकियाँ

सोशल मीडिया पर गुलाब चक्कर

सात क्विंटल का पत्थर: एक ऐतिहासिक पराक्रम

यह विशाल सात क्विंटल का पत्थर एक अनोखी ऐतिहासिक घटना का मौन साक्षी है — जब प्रसिद्ध पहलवान गुलाम मोहम्मद ने वर्ष 1900 में एक शाही आयोजन के दौरान इसे अपनी छाती पर उठाया था। अब गुलाब चक्कर में स्थापित यह पत्थर रतलाम की वीरता, शक्ति और पारंपरिक खेलों को शाही संरक्षण मिलने की समृद्ध विरासत का प्रतीक है।

उपेक्षा से

वर्षों की उपेक्षा और रखरखाव के अभाव ने गुलाब चक्कर को जर्जर स्थिति में पहुँचा दिया था। रतलाम की सांस्कृतिक जीवन का कभी प्रमुख केंद्र रहा यह ऐतिहासिक स्मारक अपनी चमक खो चुका था — धुंधली होती संरचना, टूटी हुई लाइटें, क्षतिग्रस्त रास्ते और कुल मिलाकर उसकी भव्यता में कमी आ गई थी। इस धरोहर की विरासत भुला दिए जाने के कगार पर थी।

गौरव तक

रतलाम की पुरातत्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद् और स्थानीय समुदाय के संयुक्त प्रयासों के कारण, गुलाब चक्कर को उसकी मूल भव्यता में सुंदर रूप से पुनर्स्थापित किया गया है। यह स्मारक अब फिर से अपनी वास्तुशिल्पीय सुंदरता, आकर्षक रात्रिकालीन प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छ वातावरण और पुनः जागृत सांस्कृतिक ऊर्जा के साथ चमक रहा है — और एक बार फिर से शहर की विरासत का गर्वपूर्ण प्रतीक बन गया है।

गुलाब चक्कर की खासियत

हर दिशा से समान रूप से दिखाई देने वाली विशिष्ट वृत्ताकार संरचना

7 क्विंटल वजनी ऐतिहासिक पत्थर का स्थल, जो रतलाम की शाही खेल परंपरा का प्रतीक है

गुलाब चक्कर में होने वाले कार्यक्रम व गतिविधियाँ

संगीतमय संध्याएँ और वाद्य यंत्र प्रस्तुतियाँ

स्थानीय कलाकारों के प्रदर्शन और ओपन माइक आयोजन

लोक नृत्य एवं नाट्य प्रस्तुतियाँ

रात्रिकालीन रोशनी की छटा और सांस्कृतिक विरासत भ्रमण

इस अनुभव में सहभागी बनें

रतलाम की सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ें। फ़ोटो गैलरी में सुनहरे पलों की झलक पाएं, आने वाले कार्यक्रमों की जानकारी लें, या इस ऐतिहासिक स्थल पर अपना विशेष आयोजन आयोजित करें।

सोशल मीडिया में गुलाब चक्कर की झलक

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